सरोगेसी क्या है? प्रकार, प्रक्रिया, कानून और भारत में खर्च | Pristyn Care Ferticity

जब किसी महिला के लिए प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना या गर्भावस्था पूरी करना संभव नहीं होता, तब सरोगेसी (Surrogacy) कई दंपतियों के लिए माता-पिता बनने का एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में सरोगेसी को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसके साथ कई सवाल भी जुड़े हैं—सरोगेसी क्या है, यह कैसे होती है, कौन इसके लिए पात्र है, भारत में इसके क्या नियम हैं और इसका खर्च कितना आता है?

आज भारत में सरोगेसी एक कानूनी रूप से विनियमित (regulated) प्रक्रिया है। इसका मतलब है कि हर व्यक्ति सरोगेसी नहीं करवा सकता और इसके लिए निर्धारित कानूनी शर्तों का पालन करना आवश्यक होता है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे:

  • सरोगेसी क्या होती है?
  • सरोगेसी कितने प्रकार की होती है?
  • सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया क्या है?
  • भारत में सरोगेसी से जुड़े कानून क्या हैं?
  • सरोगेसी का खर्च कितना आता है?
  • सरोगेसी के फायदे, जोखिम और सफलता दर

सरोगेसी क्या है? (What Is Surrogacy?)

सरोगेसी एक ऐसी प्रजनन प्रक्रिया (Assisted Reproductive Technology) है जिसमें एक महिला किसी अन्य दंपति या पात्र व्यक्ति के लिए गर्भ धारण करती है और बच्चे को जन्म देती है। बच्चे के जन्म के बाद उसकी कानूनी अभिभावकता इच्छुक माता-पिता (Intending Couple/Intending Woman) को मिलती है, जैसा कि लागू कानूनों के अनुसार निर्धारित होता है।

अधिकांश मामलों में सरोगेसी के लिए आईवीएफ (IVF) तकनीक का उपयोग किया जाता है। इसमें इच्छुक माता-पिता (या आवश्यक होने पर डोनर) के अंडाणु और शुक्राणु से भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है, जिसे सरोगेट महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है।

सरोगेसी क्यों की जाती है?

हर दंपति सरोगेसी का विकल्प नहीं चुनता। डॉक्टर इसकी सलाह तभी देते हैं जब गर्भधारण या गर्भावस्था को सुरक्षित रूप से पूरा करना संभव न हो।

सरोगेसी की आवश्यकता इन परिस्थितियों में हो सकती है:

  • बार-बार IVF असफल होना
  • गर्भाशय का न होना या हटाया जा चुका होना
  • जन्मजात गर्भाशय संबंधी समस्याएं
  • बार-बार गर्भपात होना
  • गंभीर चिकित्सीय स्थिति, जिसमें गर्भधारण मां के लिए जोखिम भरा हो
  • कुछ मामलों में बार-बार इम्प्लांटेशन फेल होना

सरोगेसी का निर्णय हमेशा फर्टिलिटी विशेषज्ञ द्वारा पूरी मेडिकल जांच के बाद ही लिया जाता है।

सरोगेसी कितने प्रकार की होती है?

सरोगेसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है।

1. जेस्टेशनल सरोगेसी (Gestational Surrogacy)

यह वर्तमान समय में सबसे अधिक अपनाई जाने वाली और भारत में कानूनी रूप से मान्य सरोगेसी का स्वरूप है।

इसमें:

  • सरोगेट महिला का अंडाणु उपयोग नहीं किया जाता।
  • भ्रूण IVF के माध्यम से तैयार किया जाता है।
  • सरोगेट केवल गर्भ धारण करती है।
  • जन्म लेने वाले बच्चे से सरोगेट का आनुवंशिक (Genetic) संबंध नहीं होता।

2. ट्रेडिशनल सरोगेसी (Traditional Surrogacy)

इस प्रकार की सरोगेसी में सरोगेट महिला का अपना अंडाणु उपयोग किया जाता है।

इस कारण:

  • सरोगेट महिला बच्चे की जैविक (Genetic) मां होती है।
  • वर्तमान भारतीय कानून के तहत यह व्यवस्था अनुमति प्राप्त नहीं है।

सरोगेसी कैसे होती है? (Step-by-Step Process)

सरोगेसी कई चरणों में पूरी होती है।

चरण 1: प्रारंभिक परामर्श

सबसे पहले फर्टिलिटी विशेषज्ञ दोनों इच्छुक माता-पिता का मेडिकल इतिहास और प्रजनन स्वास्थ्य का मूल्यांकन करते हैं।

इस दौरान डॉक्टर यह भी तय करते हैं कि सरोगेसी वास्तव में आवश्यक है या नहीं।

चरण 2: मेडिकल जांच

इसके बाद विभिन्न जांच की जाती हैं, जैसे:

  • हार्मोन टेस्ट
  • अल्ट्रासाउंड
  • वीर्य जांच
  • संक्रमण की जांच
  • सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण

चरण 3: कानूनी प्रक्रिया

सरोगेसी शुरू करने से पहले सभी आवश्यक कानूनी दस्तावेज पूरे किए जाते हैं।

इसमें संबंधित कानूनों के अनुसार पात्रता और आवश्यक अनुमतियों का पालन किया जाता है।

चरण 4: IVF प्रक्रिया

महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु की सहायता से लैब में भ्रूण तैयार किया जाता है।

कुछ परिस्थितियों में, यदि चिकित्सकीय रूप से आवश्यक हो और कानून अनुमति देता हो, तो डोनर गामेट्स का उपयोग किया जा सकता है।

चरण 5: भ्रूण प्रत्यारोपण (Embryo Transfer)

स्वस्थ भ्रूण को सरोगेट महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है।

यह प्रक्रिया सामान्यतः बिना किसी बड़े ऑपरेशन के पूरी हो जाती है।

चरण 6: गर्भावस्था की निगरानी

यदि भ्रूण सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित हो जाता है, तो पूरी गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और निगरानी की जाती है।

चरण 7: बच्चे का जन्म

बच्चे के जन्म के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाती है और लागू नियमों के अनुसार बच्चे की अभिभावकता इच्छुक माता-पिता को प्रदान की जाती है.

सरोगेसी के लिए कौन पात्र है?

भारत में सरोगेसी हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध नहीं है। पात्रता Surrogacy (Regulation) Act और संबंधित नियमों के अनुसार तय होती है।

आम तौर पर पात्रता का निर्धारण निम्न आधारों पर किया जाता है:

  • चिकित्सकीय आवश्यकता
  • फर्टिलिटी विशेषज्ञ की सलाह
  • निर्धारित कानूनी शर्तों का पालन
  • संबंधित प्राधिकरणों द्वारा आवश्यक अनुमोदन (जहां लागू हो)

पात्रता समय-समय पर कानूनों में संशोधन के अनुसार बदल सकती है, इसलिए नवीनतम नियमों के लिए विशेषज्ञ से परामर्श करना आवश्यक है.

सरोगेट मदर के लिए क्या योग्यताएं होती हैं?

सरोगेट महिला के लिए भी निर्धारित चिकित्सकीय और कानूनी मानदंड होते हैं।

इनमें सामान्यतः शामिल हो सकते हैं:

  • शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना
  • आवश्यक मेडिकल जांच में फिट होना
  • कानून के अनुसार निर्धारित पात्रता पूरी करना
  • गर्भावस्था के लिए चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त होना

अंतिम पात्रता संबंधित कानूनों और मेडिकल मूल्यांकन पर निर्भर करती है।

भारत में सरोगेसी से जुड़े कानून (Surrogacy Laws in India)

भारत में सरोगेसी को Surrogacy (Regulation) Act, 2021 और उससे संबंधित नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है। इन कानूनों का उद्देश्य सरोगेसी प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक बनाना है।

वर्तमान कानून के अनुसार:

  • केवल अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी (Altruistic Surrogacy) की अनुमति है।
  • कमर्शियल (Commercial) सरोगेसी की अनुमति नहीं है।
  • सरोगेसी केवल निर्धारित कानूनी और चिकित्सीय शर्तों के तहत ही की जा सकती है।
  • सरोगेसी कराने और सरोगेट बनने वाले सभी पक्षों को निर्धारित पात्रता मानदंडों का पालन करना होता है।
  • प्रक्रिया केवल अधिकृत (Registered) केंद्रों में ही कराई जानी चाहिए।

चूंकि कानून समय-समय पर अपडेट हो सकते हैं, इसलिए सरोगेसी शुरू करने से पहले फर्टिलिटी विशेषज्ञ या कानूनी सलाहकार से नवीनतम नियमों की जानकारी लेना आवश्यक है।

अल्ट्रुइस्टिक और कमर्शियल सरोगेसी में अंतर

अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी कमर्शियल सरोगेसी
कानून के तहत अनुमति प्राप्त भारत में अनुमति नहीं
सरोगेट को गर्भधारण के बदले कोई व्यावसायिक भुगतान नहीं किया जाता सरोगेट को गर्भधारण के लिए भुगतान किया जाता है
केवल मेडिकल और गर्भावस्था से जुड़े अनुमत खर्च दिए जा सकते हैं आर्थिक लाभ उद्देश्य होता है
कानूनी नियमों के अनुसार संचालित भारतीय कानून के तहत प्रतिबंधित

सरोगेसी में कितना समय लगता है?

सरोगेसी एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है।

इसमें शामिल होता है:

  • प्रारंभिक परामर्श
  • मेडिकल जांच
  • कानूनी प्रक्रिया
  • IVF उपचार
  • भ्रूण प्रत्यारोपण
  • गर्भावस्था (लगभग 9 महीने)

पूरी प्रक्रिया में कई महीने से लेकर लगभग एक वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है। वास्तविक समय प्रत्येक मामले की मेडिकल स्थिति और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

भारत में सरोगेसी का खर्च कितना है?

भारत में सरोगेसी की लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे:

  • शहर
  • फर्टिलिटी सेंटर
  • IVF चक्रों की संख्या
  • आवश्यक दवाएं
  • मेडिकल जांच
  • कानूनी प्रक्रिया
  • गर्भावस्था के दौरान चिकित्सा देखभाल

चूंकि वर्तमान कानून के तहत केवल अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी की अनुमति है, इसलिए लागत का स्वरूप पहले की तुलना में बदल गया है।

सटीक खर्च जानने के लिए संबंधित फर्टिलिटी सेंटर से व्यक्तिगत परामर्श लेना सबसे उचित रहता है।

सरोगेसी की सफलता दर

सरोगेसी की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है।

इनमें शामिल हैं:

  • महिला की उम्र
  • अंडाणु की गुणवत्ता
  • शुक्राणु की गुणवत्ता
  • भ्रूण की गुणवत्ता
  • IVF लैब की गुणवत्ता
  • सरोगेट महिला का स्वास्थ्य
  • गर्भाशय की स्थिति

यदि उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण का उपयोग किया जाए और सभी मेडिकल स्थितियां अनुकूल हों, तो सफलता की संभावना बेहतर हो सकती है। हालांकि, कोई भी फर्टिलिटी उपचार 100% सफल होने की गारंटी नहीं देता।

सरोगेसी के फायदे

सरोगेसी कई दंपतियों के लिए माता-पिता बनने का अवसर प्रदान करती है।

इसके प्रमुख लाभ हैं:

  • गर्भधारण संभव न होने पर परिवार शुरू करने का विकल्प
  • कुछ मामलों में आनुवंशिक रूप से अपना बच्चा होने की संभावना
  • बार-बार गर्भपात की स्थिति में विकल्प
  • गर्भाशय संबंधी समस्याओं वाली महिलाओं के लिए उपयोगी
  • चिकित्सकीय कारणों से गर्भावस्था संभव न होने पर समाधान
  • IVF के साथ प्रभावी उपचार विकल्प

सरोगेसी के संभावित जोखिम

हालांकि सरोगेसी एक स्थापित चिकित्सा प्रक्रिया है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी हो सकते हैं।

इच्छुक माता-पिता के लिए

  • IVF असफल होना
  • भ्रूण का प्रत्यारोपण सफल न होना
  • गर्भपात का जोखिम
  • भावनात्मक तनाव

सरोगेट महिला के लिए

  • सामान्य गर्भावस्था से जुड़े जोखिम
  • उच्च रक्तचाप
  • गर्भकालीन मधुमेह
  • समय से पहले प्रसव
  • सी-सेक्शन की आवश्यकता

इन जोखिमों को कम करने के लिए पूरी गर्भावस्था के दौरान नियमित चिकित्सा निगरानी की जाती है।

क्या सरोगेसी सुरक्षित है?

यदि सरोगेसी योग्य फर्टिलिटी विशेषज्ञों की देखरेख में, अधिकृत केंद्र में और कानूनी नियमों का पालन करते हुए की जाए, तो यह सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है।

सुरक्षित सरोगेसी के लिए आवश्यक है:

  • पूरी मेडिकल जांच
  • कानूनी प्रक्रिया का पालन
  • नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप
  • अनुभवी फर्टिलिटी टीम
  • समय पर उपचार और निगरानी

सरोगेसी के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

यदि सरोगेसी की योजना बनाई जा रही है, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • केवल अनुभवी और पंजीकृत फर्टिलिटी सेंटर का चयन करें।
  • सभी मेडिकल जांच समय पर कराएं।
  • कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समझें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें।
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
  • नियमित फॉलो-अप विजिट करें।
  • सभी मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

यदि आपको निम्न में से कोई समस्या है, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श करें:

  • लंबे समय से गर्भधारण न होना
  • बार-बार IVF असफल होना
  • बार-बार गर्भपात होना
  • गर्भाशय संबंधी गंभीर समस्या
  • जन्मजात गर्भाशय की अनुपस्थिति
  • ऐसी मेडिकल स्थिति जिसमें गर्भधारण मां के लिए असुरक्षित हो

समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेने से सही उपचार विकल्प चुनने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

सरोगेसी उन दंपतियों और पात्र महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प है जो चिकित्सकीय कारणों से स्वयं गर्भधारण या गर्भावस्था पूरी नहीं कर सकतीं। आधुनिक IVF तकनीक और बेहतर प्रजनन चिकित्सा ने इस प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया है। हालांकि, भारत में सरोगेसी एक कानूनी रूप से विनियमित प्रक्रिया है और इसे केवल निर्धारित नियमों और पात्रता मानदंडों के अनुसार ही किया जा सकता है।

यदि आप सरोगेसी पर विचार कर रहे हैं, तो किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लेकर अपनी मेडिकल स्थिति, उपलब्ध विकल्पों और लागू कानूनी प्रावधानों को अच्छी तरह समझना आवश्यक है। सही जानकारी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन आपको सुरक्षित और सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. सरोगेसी क्या होती है?

सरोगेसी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक महिला किसी अन्य पात्र दंपति या महिला के लिए गर्भ धारण करती है और बच्चे को जन्म देती है। यह प्रक्रिया आमतौर पर IVF तकनीक की मदद से की जाती है।

2. भारत में कौन-सी सरोगेसी कानूनी है?

भारत में वर्तमान कानून के अनुसार केवल अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी की अनुमति है। कमर्शियल सरोगेसी की अनुमति नहीं है।

3. सरोगेसी में कितना समय लगता है?

मेडिकल जांच, कानूनी प्रक्रिया, IVF उपचार और गर्भावस्था सहित पूरी प्रक्रिया में कई महीने से लेकर लगभग एक वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है।

4. क्या सरोगेसी में बच्चा जैविक रूप से माता-पिता का होता है?

जेस्टेशनल सरोगेसी में, यदि इच्छुक माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु का उपयोग किया जाता है, तो बच्चा आनुवंशिक रूप से उन्हीं से संबंधित हो सकता है। यह प्रत्येक मामले की चिकित्सा परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

5. क्या सरोगेसी सुरक्षित है?

योग्य फर्टिलिटी विशेषज्ञों की देखरेख और कानूनी नियमों का पालन करते हुए की गई सरोगेसी सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है, हालांकि हर गर्भावस्था की तरह इसमें भी कुछ जोखिम हो सकते हैं।

6. क्या सरोगेसी से 100% प्रेग्नेंसी की गारंटी मिलती है?

नहीं। सरोगेसी और IVF दोनों में सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे महिला की उम्र, भ्रूण की गुणवत्ता, सरोगेट का स्वास्थ्य और अन्य चिकित्सीय स्थितियां।

7. सरोगेसी और IVF में क्या अंतर है?

IVF एक फर्टिलिटी तकनीक है जिसमें लैब में भ्रूण तैयार किया जाता है, जबकि सरोगेसी एक व्यवस्था है जिसमें वही भ्रूण सरोगेट महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है ताकि वह गर्भावस्था पूरी कर सके।

8. क्या सरोगेसी के लिए IVF जरूरी है?

जेस्टेशनल सरोगेसी में IVF प्रक्रिया आवश्यक होती है क्योंकि भ्रूण लैब में तैयार करके सरोगेट के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है।

9. सरोगेसी का खर्च किन बातों पर निर्भर करता है?

सरोगेसी की लागत शहर, फर्टिलिटी सेंटर, IVF उपचार, मेडिकल जांच, दवाओं, कानूनी प्रक्रिया और गर्भावस्था के दौरान आवश्यक चिकित्सा देखभाल पर निर्भर करती है।

10. सरोगेसी के लिए डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

यदि लंबे समय से गर्भधारण नहीं हो रहा है, बार-बार IVF असफल हो रहा है, बार-बार गर्भपात हो रहा है या गर्भधारण मां के लिए चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित नहीं है, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।